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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
ग्रामीण महिलाओं के सषक्तिकरण में लघु उद्योग की भूमिका का विष्लेषणात्मक अध्ययन (छत्तीसगढ़ के संदर्भ में)
Authors
मुक्ता वैश्णव
Abstract
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा उनकी सामाजिक एवं व्यावसायिक सहभागिता को बढ़ाने में लघु उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लघु उद्योग महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करते हैं, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। लघु उद्योगों में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी उनके आर्थिक-सामाजिक एवं व्यावसायिक सशक्तिकरण को सुदृढ़ करने में सहायक होती है। लघु उद्योगों से जुड़कर महिलाएँ आय अर्जित करने के साथ-साथ अपने कौशल का विकास करती हैं तथा आर्थिक निर्णयों में अपनी भूमिका सुनिश्चित करती हैं। विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से लघु उद्योगों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, तकनीकी सहयोग तथा बाजार संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों में उनकी भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अतः प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में लघु उद्योगों की भूमिका का विश्लेषण करना तथा यह ज्ञात करना है कि लघु उद्योग ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक सशक्तिकरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही अध्ययन में लघु उद्योगों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता, उपलब्ध अवसरों तथा उनके समक्ष विद्यमान चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है।
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Pages:112-114
How to cite this article:
मुक्ता वैश्णव " ग्रामीण महिलाओं के सषक्तिकरण में लघु उद्योग की भूमिका का विष्लेषणात्मक अध्ययन (छत्तीसगढ़ के संदर्भ में)". International Journal of Social Research and Development, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 112-114
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