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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
भारत की रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा की मजबूत स्थिति: आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक बदलाव
Authors
आरती कुमारी, उमेश कुमार
Abstract
साधारण शब्दों में, राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ है राष्ट्रीय सरक्षा। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे प्राप्त करने के लिए सभ्यता के प्रारम्भ से ही किसी न किसी रूप में प्रयास किये जाते रहे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में हो रही क्रान्ति के कारण विश्व के लोग आज एक-दूसरे के निकट आते जा रहे हैं। प्रौद्योगिकी में तेजी से आ रहे बदलाव में विशेषतया परमाणु बम के निर्माण ने इस तथ्य पर बल दिया कि मानव समुवाय अस्तित्व रक्षा के लिए कौन सी युक्ति अपनाये और किन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए आगे बढ़े जो उसका भविष्य सुरक्षित कर सके। ऐसी स्थिति में रक्षा योजना की भावना ने जोर पकड़ा और राष्ट्रीय सुरक्षा देश की तत्कालिक आवश्यकताओं के साथ ही नहीं बल्कि दूरगामी प्रतिबद्धताओं के साथ जोड़ी जाने लगी। विश्व भर में हुए युद्धों से नये अनुभवों का विकास हुआ और इस प्रकार सुरक्षा के मामलों में रुचि रखने वालों का दायरा बढ़ गया। रक्षा सम्बन्धी योजनाओं और रणनीतिक मामलों में राजमर्मज्ञों और सेनानायकों की भूमिका दिन प्रति दिन बदलने लगी। यह माना जाने लगा कि सुरक्षा का प्रश्न व्यक्तिगत से लेकर राष्ट्रीय तो है ही किन्तु इसे अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। राष्ट्र का सम्पूर्ण विकास और उसके राष्ट्रीय हितों एवं स्वतन्त्रता की रक्षा ही उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा है। वास्तव में प्रत्येक राष्ट्र की प्रतिष्ठा और शक्ति का मापदण्ड उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा ही होती है। राष्ट्र का साम्प्रदायिक सदभाव, वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति, सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक विकास एवं प्रबन्धन के साथ इंटेलीजेंस, कूटनीति, राष्ट्रीय नेतृत्व एवं तीनों सेनायें मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला तैयार करती है।
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Pages:115-121
How to cite this article:
आरती कुमारी, उमेश कुमार "भारत की रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा की मजबूत स्थिति: आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक बदलाव". International Journal of Social Research and Development, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 115-121
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