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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
प्रधानमंत्री उज्जवला योजनाः ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक स्तर पर प्रभाव
Authors
डॉ. पुष्पा देवांगन, डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन
Abstract
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के शुरू होने से गरीब परिवार की महिलाओं में खुशी का माहौल रहा। शुरूआती चरण में इस योजना में गरीब परिवारों ने खूब बढ़-चढ़कर भाग लिया लेकिन अब इस योजना की चमक फीकी पड़ने लगी है। यह योजना शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रांे में रह रहे परिवारों जो कि गरीबी रेखा से नीचे हैं उनको निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाने का प्रावधान किया गया। परंतु जिस उद्देश्य से इस योजना को लागू किया गया वह शुरूआती दौर में बखूबी पूरा भी हुआ लेकिन मुफ्त में मिले सिलेण्डर के खाली होने पर वे महिलायें फिर से लकड़ी कण्डे, कोयला व धुएं से जूझने लगी हैं। दरअसल मुफ्त में मिले गैस कनेक्शन का सिलेण्डर भराने जब से लोग एजेंसी पहुंचे तो उन्हें पता चला कि योजना ये गैस कनेक्शन के साथ खाली सिलेण्डर व रेगुलेटर ही मुफ्त दिये गये। जिनकी कीमत करीब 1600 रूपये हैं इसके साथ जो भरा सिलेण्डर दिया गया उसकी गैस की कीमत करीब 750 रूपये चूल्हा 900 रूपये व नली की कीमत 100 रूपये कुल मिलाकर 1600 रूपये हितग्राहियों को लोन के रूप में दिये गये। ये लोन किस्तों में चुकाना होगा जब गैस भराने आओगे तो सिलेण्डर की पूरी कीमत देनी पड़ेगी। इसमें जो सब्सिडी मिलेगी वह किस्त के रूप में कटती रहेगी जब तक यह पूरा लोन अदा नहीं हो जाता। जब हितग्राहियों का यह पता चला तो उन्होने सिलेण्डर रिफिल भरवाना ही बंद कर दिया। दरअसल ग्रामीण परिवार की औसत आय तीन हजार से चार हजार रूपये है, ये परिवार प्रतिमाह 800 रूपये गैस पर खर्च करने में सक्षम नहीं है। इसलिए इस योजना में संशोधन करने की आवश्यकता है।
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Pages:44-47
How to cite this article:
डॉ. पुष्पा देवांगन, डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन "प्रधानमंत्री उज्जवला योजनाः ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक स्तर पर प्रभाव". International Journal of Social Research and Development, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 44-47
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